पहले डेयरी, अब मक्का… टैरिफ के मुद्दे पर भारत पर बढ़ता अमेरिकी दबाव
नई दिल्ली, 16 सितंबर 2025 — भारत और अमेरिका के व्यापार संबंधों में एक बार फिर से तनाव उभरता दिखाई दे रहा है। इस बार मामला मक्के (कॉर्न) के आयात पर टैरिफ यानी आयात शुल्क का है। अमेरिका का आरोप है कि भारत द्वारा लगाए गए ऊंचे आयात शुल्क अमेरिकी किसानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और यह विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के खिलाफ है। इससे पहले डेयरी उत्पादों को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं।
अमेरिका का दावा
अमेरिका का कहना है कि भारत ने मक्के पर 50% से अधिक का आयात शुल्क लगा रखा है, जिससे अमेरिकी उत्पादकों को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों का दावा है कि यदि भारत अपने टैरिफ में कटौती करता है तो इससे दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार में नया संतुलन बन सकता है। अमेरिका ने इस मुद्दे को द्विपक्षीय वार्ताओं के दौरान बार-बार उठाया है और अब यह मामला फिर से सुर्खियों में है।
भारत की स्थिति
भारत ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि आयात शुल्क उसकी घरेलू कृषि सुरक्षा नीति का हिस्सा है। भारत का तर्क है कि उसकी बड़ी जनसंख्या कृषि पर निर्भर है और किसानों की आजीविका की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है। इसके अलावा, भारत के मुताबिक WTO के नियमों के तहत विकासशील देशों को कुछ हद तक टैरिफ लगाने की छूट दी गई है।
डेयरी के बाद अब मक्का
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने भारत पर टैरिफ को लेकर दबाव डाला हो। कुछ समय पहले अमेरिकी डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजार में लाने के लिए अमेरिका ने जोर दिया था, लेकिन धार्मिक कारणों और गुणवत्ता मानकों के आधार पर भारत ने इन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाए रखा। अब अमेरिका की निगाहें मक्के के व्यापार पर हैं, जो विश्व स्तर पर एक बड़ा कृषि उत्पाद है और बायोफ्यूल, पशु चारे तथा खाद्य उत्पादों के रूप में इसका उपयोग होता है।
व्यापारिक संबंधों पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मुद्दे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी में वृद्धि हुई है, लेकिन व्यापारिक टकराव इस रिश्ते में खटास पैदा कर सकते हैं।
निष्कर्ष
टैरिफ को लेकर भारत और अमेरिका के बीच चल रही यह खींचतान आने वाले समय में और भी तेज हो सकती है। भारत को अपने किसानों और घरेलू बाजार की सुरक्षा करनी है, वहीं अमेरिका अपने उत्पादों के लिए नए बाजार चाहता है। दोनों देशों के बीच सामंजस्य स्थापित करना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन द्विपक्षीय वार्ता और समझौते इस गतिरोध को सुलझाने का एकमात्र रास्ता हो सकते हैं।











